विद्यालय मा पढ़त बाल-बच्चन हुक्का के लत मा फँसत, प्रशासन चुप-चाप
कपुरी, डेक्स।
चन्द्रौटा बजार अउर आसपास के इलाका मा विद्यालय मा पढ़त बाल-बच्चन हुक्का के लत मा फँसत जात हे। होटल क्याफे अउर रेस्टुरेन्टन मा खुलेआम हुक्का उपलब्ध होखे से नाबालिग किशोर-किशोरी भी एकरा तरफ आकर्षित होत जात हे। ई अवस्था अभिभावकन अउर समाज खातिर गम्भीर चिन्ता के विषय बा।
स्थानीय लोगन के अनुसार कई गो होटल अउर क्याफेन मा विद्यालयी उमिर के छात्र-छात्रा समूह बना के हुक्का पीयत नजर आवत हे । हुक्का के बढ़त प्रयोग से बाल-बच्चन के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़े के सम्भावना बढ़ि हे फेर भी सम्बन्धित निकायन क ओर से प्रभावकारी निगरानी अउर कारवाही देखे के नइखे मिलत।
डाक्टर महेश गुप्ताके मुताविक हुक्का के धुँआ चुरोट से कम हानिकारक नइखे। लगातार हुक्का पिये से फोक्सो मुटु अउर श्वासप्रश्वास सम्बन्धी समस्या पैदा हो सकत हे । कम उमिर मा ई लत लागे से पढ़ाई अनुशासन अउर मानसिक विकास पर भी खराब असर पड़ सकत हे।
अभिभावकन के कहनाम हौ कि व्यापार के नाम पर होटल अउर क्याफे संचालकन द्वारा नाबालिग बाल-बच्चन के हुक्का उपलब्ध करावल गलत हो। व्यवसायी लोगन के सामाजिक जिम्मेवारी बुझत अइसन गतिविधि तुरन्त रोकै के चाही।
स्थानीय सरकार प्रहरी प्रशासन अउर सम्बन्धित निकायन से बजार क्षेत्र मा नियमित अनुगमन बढ़ावे नाबालिगन के हुक्का बिक्री अउर सेवन पर रोक लगावे साथै विद्यालय स्तर पर सचेतनामूलक कार्यक्रम सञ्चालन करे के माँग उठत हे।
समाजसेवी लोगन के मत हे कि समय रहते ई समस्या पर ध्यान ना दिहल गवा त हुक्का संस्कृति आगे चल के अउर गम्भीर दुर्व्यसन के रूप ले सकत हे। एही से बाल-बच्चन के भविष्य बचावे खातिर अभिभावक व्यवसायी विद्यालय, स्थानीय सरकार अउर प्रशासन सभे पक्ष जिम्मेवार बने के जरूरत बा।
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